| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102251) | |
23051. NGOs come together to make masks; Kolkata youths raise funds for needy neighbours
- Project Karuna, an initiative by SwitchON Foundation, Active Citizens Together for Sustainability (ACTS) and JITO, focuses on ensuring that everyone in the city has access to two cotton masks each. In collaboration with the district rural development cells, the project started ‘Women Cotton Mask Ventures’ where over 200 women entrepreneurs from various self-help groups (SHG) are making masks across the districts.
- The target is to train 1,000 women to make 10,00,000 masks. Till date, 45,000 masks have been made. And locals on Sukeas Street have set up a kitchen and have been feeding around 200 daily wagers and pavement dwellers in the area over the past 20 days.
- Each woman can make up to Rs 15,000 a month from stitching masks. The products are being sold at Rs 20 in retail and Rs 15 in bulk,” Jaju said. In Kolkata, NSIC, Howrah, employee Sujit Kumar Shaha has distributed more than 2,500 masks among the needy around Dum Dum Cantonment. A group of college and high school students in Metiabruz have raised funds for more than 13,000 poor neighbours over the past 15 days.
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23052. घर-घर मास्क-राशन बांट रही दिव्यांगों की 'दिव्य' टीम, पीएम मोदी भी सलमान के जज्बे को कर चुके हैं सलाम
- दिव्यांगों की एक दिव्य टोली घर-घर मास्क और राशन पहुंचाने में जुटी है. शारीरिक रूप से सक्षम लोगों को मानवीयता की नई इबारत पढ़ाने में जुटी यह टीम, मुरादाबाद के हमीरपुर गांव के दिव्यांग सलमान खान की अगुवाई में लगातार आगे बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हमीरपुर गांव निवासी सलमान खान की चप्पल और डिटर्जेट बनाने की फैक्ट्री है.
- कोरोना संकट के कारण काम बंद है और दिव्यांग मजदूर भी खाली पड़े हैं. ऐसे में इस नेक कार्य को परवान चढ़ाने का निर्णय लिया गया. यहां कार्य करने वाले 30 दिव्यांग खुद मास्क बना रहे हैं और उन्हें घर-घर पहुंचाने में जुटे हैं.
- राशन का वितरण करीब 150 लोगों में हो चुका है. सलमान का कहना है कि वह बचपन से ही दिव्यांग हैं. इस वजह से बहुत सी दुश्वारियां भी झेलीं हैं. जब भी किसी दिव्यांग को देखते हैं, तो उसमें हिम्मत पैदा करने का प्रयास करते हैं. शायद यही वजह भी है कि उन्होंने अपनी फैक्ट्री डाली और दिव्यांगों में छिपे हुनर को उभारने का प्रयास किया
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23053. मां बना रही घर पर मास्क, बेटा घूम घूम कर बांट रहा पूरे गांव में नि:शुल्क
- देवेंद्र सेठिया जो स्थानीय शहीद गुंडाधूर स्नाकोत्तर महाविद्यालय में बीएएससी प्रथम वर्ष के छात्र है और राष्ट्रीय सेवा योजना के वालीटियर हैं।
- उसकी मॉ रूक्मणी घर पर कपड़ा आदि सिलने का काम करती है। उसने अपने काम छोडक़र कपड़ों की कतरन व कुछ कपड़ों को जोड़तोड कर माक्स बनाना शूरू किया।
- देवेंद्र ने बताया किए उसकी मॉ रोजाना सुबह माक्स बनाती है और फिर मैं उसे लेकर गांव में बॉटने के लिए निकल जाता हूॅ।
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23054. गांव की महिलाओं ने दो महीने में बेचे 1 लाख के मास्क
- ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लिया लोन - गांव में रहने वाली पूनम सिसोदिया ग्रैजुएट हैं, लेकिन घर के कामों में ही बिजी रहती थीं। लॉकडाउन में रोजगार जाने की बातें हो रही थीं। इसी दौरान पूनम ने कुछ अलग करने की सोची। परिवार ने भी साथ दिया। उन्होंने गांव की कमलेश, संगीता, शीतल, उर्मिला, रामेश्वरी, रश्मि, प्रियंका, बिमलेश और रामवती के साथ मिलकर साईं बाबा स्वयं सहायता समूह के नाम से ग्रुप बनाया। जिला प्रशासन के पास इसका रजिस्ट्रेशन कराया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशासन ने उनको एक लाख रुपये का लोन भी दिलाया। उसके बाद पिलखवा और दादरी से कपड़ा आदि कच्चा माल लेकर मास्क बनाना शुरू कर दिया। गांव में ही महिलाओं ने सिलाई मशीनों से मास्क बनाए।500 मास्क रोज कर रहीं तैयार
- 4 हजार से ज्यादा मास्क खरीदे NTPC ने - एनटीपीसी ने इस समूह से 4030 फेस मास्क खरीदे। ज़िला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं अन्य संस्थाओं को भी उन्होंने मास्क दिए हैं। पिछले दो माह में उन्होंने एक लाख रुपये से ज्यादा के मास्क बेच दिए हैं। गांव से सटे एनटीपीसी ने इनको सबसे अधिक ऑर्डर दिया।
- "गांव की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर बेहतरीन काम किया है। एनटीपीसी ने अपने दायित्वों का पालन करते हुए गांव की इन महिलाओं को ट्रेनिंग भी कराई थी। मास्क खरीद कर हमने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सहयोग दिया है।" -पंकज सक्सेना, प्रबंधक कॉरपोरेट कम्युनिकेशन
23055. नहीं है एक हाथ, फिर भी बच्ची ने लोगों के लिए सिले मास्क
- मामला कर्नाटक से है जहां एक 10 वर्षीय बच्ची ने अपने एक हाथ से मास्क सिले और कुछ छात्रों में बाटें। सोशल मीडिया पर बच्ची के जज्बे की खूब तारीफ हो रही है| ’10 वर्षीय सिंधुरी उडुपी की रहने हैं। वह दिव्यांग है। इसके बावजूद उन्होंने अपने एक हाथ से मास्क सिलकर जरुरतमंदों में बाटें। दरअसल, सिंधुरी ने गुरुवार को यह मास्क एसएसएलसी की परीक्षा देने आए छात्रों को दिए।’
- रिपोर्ट के मुताबिक, सिंधुरी कई मास्क सिल चुकी हैं। वो भी सिर्फ अपने एक हाथ से। दरअसल, जब सिंधुरी का जन्म हुआ तो उनके बाएं हाथ की कोहनी के नीचे का हिस्सा नहीं था। लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कोरोना संकट के दौरान भी उन्होंने लोगों के लिए मास्क बनाए।
- सिंधुरी छठी कक्षा में पढ़ती हैं और एक स्काउट एंड गाइड हैं जिनका लक्ष्य, एक लाख लोगों के लिए मास्क बनाना है।
23056. 'आत्मनिर्भर भारत' की मिसाल हैं काशी के जितेंद्र, जानिए रियल हीरो के जीवन की कहानी
- सारनाथ के हीरामनपुर गांव में रहने वाले जितेंद्र वर्मा के शरीर के नीचे का हिस्सा काम न करने के बावजूद भी जितेंद्र ने कभी हौसला नहीं हारा और पिछले 17 सालों से बिस्तर पर लेट कर ही सिलाई का काम करते आ रहे हैं, और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
- 23 फरवरी 2003 को जितेंद्र की ज़िंदगी से खुशियां चली गई थीं। एक अच्छे टेलर मास्टर की जिंदगी में उस मनहूस दिन ने वो भूचाल ला दिया कि अब वो बैठने के लायक भी नहीं रहे। आपको बता दें कि 2003 में हुए एक एक्सीडेंट में जितेंद्र के शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लगने की वजह से अब वह कभी भी चल फिर नहीं सकते और न ही बैठ सकते हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी अपना हौसला नहीं हारा और अपनी उम्मीद को बांधे रखा।
- जितेंद्र ने दोबारा अपने सिलाई के काम को शुरू किया और अपने हुनर की अपनी पहचान बनाई। जितेंद्र बेड पर ही लेटे-लेटे लोगों के लिए कपड़े सिलते हैं। वहीं वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते इन दिनों मास्क सिलकर अपने आसपास के मोहल्लों में मुफ्त में वितरण कर रहे हैं ताकि इस कोरोना वायरस से लड़ा जा सके। इसके साथ ही वो और लोगों को आत्मनिर्भर होने के गुर भी सिखाते हैं।
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23057. ढलती उम्र में है दूसरों के लिए कुछ करने की चाह, खुद सिलकर मुफ्त में बांटे 2000 मास्क
- मास्क बनाने की मुहिम के बारे में वह बतातीं हैं, “जब लॉकडाउन हुआ तब मैं बेंगलुरू में बेटे के घर में थी। एक दिन मेरी बेटी ने एक वीडियो भेजा कि कैसे लोग घरों पर ही मास्क बना रहे हैं। इसके बाद ही मैंने मास्क बनाना शुरू किया।”
- जब तक वह बेंगलुरू में रहीं तो वहाँ पर हाथ से ही मास्क बनाकर सफाई कर्मचारी, सब्ज़ीवालों, चौकीदार आदि को बांटतीं रहीं। लॉकडाउन के बाद वह सांगली लौट आईं। यहाँ भी अपने सभी काम करते हुए उन्होंने मास्क बनाना ज़ारी रखा। यहाँ पर वह अपनी सिलाई मशीन से मास्क बनाती हैं। उन्होंने अब तक 2000 से भी ज्यादा मास्क बांटे हैं।
- “अब तो मेरे जीवन का उद्देश्य यही है कि मैं दूसरों की सेवा कर पाऊं। किसी ज़रूरतमंद के लिए कुछ करूँ, इससे ज्यादा और क्या चाहिए? बाकी मेरे बच्चे और उनके बच्चे हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ढलती उम्र में अक्सर यही लगता है कि कुछ करने के लिए नहीं है लेकिन यह सिर्फ एक मिथक है। कभी भी यह नहीं सोचें कि अब आप कुछ नहीं कर सकते, अब जितनी सांसे मिली हैं, कम से कम उनमें तो किसी के लिए कुछ करने की कोशिश कर ही सकते हैं,” उन्होंने कहा।
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23058. Mask making is a regular activity at this home for abandoned intellectually-challenged children in Chennai
- The tailoring unit at Sri Arunodayam in Kolathur was up against a steep target. Three thousand masks had to be delivered to the voluntary organisation REACH, and the work had to be accomplished in 15 days, with 12 tailors. In regular circumstances, this would hardly be a pressure-cooker situation.
- They work from 10 a.m. to 5 p.m. usually, and on days with an unusual ask, they put in those much-needed extra hours. That is how they met this target.
- This month, Sri Arunodayam, a non-profit that provides a home for 108 children with intellectual disabilities who have been abandoned by their parents, completes one year of its mask project.
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23059. Homeopathy and Unani effective in prevention of novel coronavirus infections: AYUSH ministry
- It recommended that homoeopathic medicine Arsenicum album 30 could be taken empty stomach daily for three days as a preventive medicine against the infection.
- It also suggests some Ayurvedic practices and medicines, Unani drug decoctions and home remedies which can be useful in prevention of nCoV infection.
- The ministry has advised covering face while coughing or sneezing and preferably using an N95 mask while travelling or working in public places to avoid droplet transmissions. It also recommended prophylactic measures/immunomodulatory drugs as per Ayurvedic practices and taking measures to strengthen the immune system through a healthy diet and lifestyle practices.
23060. हर्बल से भागेगा कोरोना? ICAR का दावा- मिल गए वो पौधे जिनका रस कर सकता है कोविड-19 का खात्मा
- भारतीय वैज्ञानिकों ने कुछ हर्बल पौधों में ऐसे कम्पाउंड पाए हैं जिनसे कोरोना वायरस (Coronavirus) का इलाज किया जा सकता है। यह दावा हिसार के नैशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वॉइन्स (NRCE) के वैज्ञानिकों का है। NRCE इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के तहत आने वाला संस्थान है।
- ICAR ने इस रिसर्च की फाइंडिग्स पर फॉर्मल नोट जारी किया। इससे वैज्ञानिकों के लिए कोविड-19 मरीजों के इलाज का कोई रास्ता निकल सकता है। NRCE के डेप्युटी डायरेक्टर जनरल (एनिमल साइंस) बीएन त्रिपाठी ने बताया कि यह ऐसी लीड है जिसने NRCE के साइंटिस्ट्स को कई वायरस के खिलाफ अच्छे नतीजे दिए हैं। हालांकि उन्होंने उन पौधों के बारे में इस वक्त बताने से मना कर दिया।
- कोरोना वायरस के शुरुआती मॉडल पर बेस्ड है रिसर्च - नोट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के समय आपात स्थिति को देखते हुए ICAR-NRCE हिसार के वैज्ञानिकों ने कुछ नैचरल प्रॉडक्ट्स के असर का आंकलन किया। ये प्रॉडक्ट्स इंसानी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित हैं और आमतौर पर खांसी-बुखार ठीक करने में यूज होते हैं। साइंटिस्ट्स ने चिकन कोरोना वायरस के इन्फेक्शन मॉडल का स्टडी में इस्तेमाल किया ताकि कुछ हर्बल पौधों के एंटीवायरल इफेक्ट को जांचा जा सके।